U. Shadha Nakshatra

Ashvini Nakshatra

उत्तराषाढ़ नक्षत्र

उत्तराषाढ़ नक्षत्र सप्तम्बर महीने के पहले पक्ष में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 4 -4 तारो से बना हुआ है इसका स्वरुप आकाश में हाथी जैसा दिखाई देता है धनु राशि उत्तराषाढ नक्षत्र –प्रथम चरण- धनु राशि 26 अंश 40 कला से 30 अंश तक होता है मकर राशि उत्तराषाढ नक्षत्र –द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ चरण–मकर राशि 0 अंश से 10 अंश तक होता है

धनु राशि उत्तराषाढ़ नक्षत्र का स्वभाव:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का परोपकारी, कृतज्ञ । विद्वान, विनोदी, उच्च आदर्शवादी, प्रसन्नचित्त, आशावादी

मकर राशि उत्तराषाढ़ नक्षत्र का स्वभाव:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का - तीक्ष्ण बुद्धि, दूर दृष्टि, विनम्र, उदार, कुशल वक्ता, कृतज्ञ, सत्यमार्गी एवं सत्यभाषी, विश्वसनीय, गणितज्ञ, मितव्ययी ।

धनु राशि उत्तराषाढ़ नक्षत्र व्यवसाय:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक शिक्षा, धर्म, न्यायाधीश, बैंक, वित्त, राजनयिक, राजदूतावास, अस्पताल, जेल व कस्टम विभाग, जलयान अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार, आयुर्वेदिक दवाइयां, सैनिक, पहलवान, घुड़सवार, महावत ।

मकर राशि उत्तराषाढ़ नक्षत्र व्यवसाय:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक भूमिगत व्यवसाय, खान, कोयला, वित्त विभाग, वैज्ञानिक, आयकर विभाग, अनुसंधान, जेल एवं नियंत्रण (कन्ट्रोल) विभाग, इन्जीनियर, ऊन, चमड़ा, खालें व हड्डियां, होम्योपैथी, पुरातत्व विभाग, दुर्लभ वस्तुएं, प्राचीन भाषाएं, दुभाषिया ।


इस उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें




धनु राशि उत्तराषाढ़ नक्षत्र रोग:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें साइटिका, गठिया, कमर दर्द, पक्षाघात, उदर दर्द, चर्म रोग, नेत्र रोग, श्वसन सम्बन्धी रोग

मकर राशि उत्तराषाढ़ नक्षत्र रोग:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें गैस से सम्बन्धित रोग, गज चर्म (एक्जीमा), चर्म रोग, कोढ़, श्वेत कुष्ठ, गठिया, हृदय रोग, धड़कन, पाचन असंतुलन।

धनु राशि उत्तराषाढ़ राशीश गुरु

मकर राशि उत्तराषाढ़ राशीश शनि

• नक्षत्र अंग – जांघें, अस्थि, धमनी । चर्म, घुटना, पटेला (घुटने का ढक्कन)

• नक्षत्र वृक्ष कटहल है ।

• नक्षत्र रंग - लाल

• नक्षत्र तत्व - पृथ्वी

• नक्षत्र गणना - स्थिर

• नक्षत्र स्वामी - शुक्र

• नक्षत्र के देवता - विश्वेदेव

• नक्षत्र मंत्र - ॐ उत्तराषाढ़भ्यां नमः

• वर्ण : वैश्य

• वशय : चतुश्पद

• योनि : नकुल

• गण : मनुष्य

• नाड़ी : अंत्य

नक्षत्र साधना उपासना

उत्तराषाढ़ नक्षत्र – प्रथम चरण- धनु राशि द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ चरण–मकर राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है

प्रथम चरण का स्वामी : गुरु

गायत्री मंत्र और हवन

द्वितीय चरण का स्वामी : शनि

गणेश पूजन

तृतीय चरण का स्वामी : शनि

गायत्री मंत्र जप और हवन

चौथे चरण का स्वामी : गुरु

गायत्री मंत्र जप और हवन

Special Tips:

उत्तराषाढ़ नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को कृत्तिका - उत्तराफाल्गुनी - उत्तराषाढ़ा इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए

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